जागते रहो

कुछ दिनों से सोच रहा हूँ घर के दरवाजों को रात भर खुला ही रखूँ देश में इतने चौकीदार जो हो गए है । चौकीदारी कहाँ की कर रहे हैं पता नहीं, रास्तों पर दीखते भी है नहीं, पर काफी बवाल हो रहा हैं, तो कर रहे होंगे रखवाली कही अपनी Facebook प्रोफाइल या Twitter … Continue reading जागते रहो

क्या होता अगर इस शहर में दीवारें होती?

क्या होता अगर इस शहर में दीवारें होती? क्या होता अगर इस जज़ीरे ने सालों पहले अपनी मुट्ठी बंद कर ली होती?   अगर कोई आ जा न पाता, बारिश की उन बूँदों के सिवा जो इसकी उंगलियों के बीच नाचती, इसका मज़ाक उड़ाती और फिर इसकी ज़मीन खुरेदकर थोड़ी सी मिट्टी चुराके डुबो देती … Continue reading क्या होता अगर इस शहर में दीवारें होती?

मेरे घर क आस पास कई गलियाँ खोदी गई हैं

मेरे घर क आस पास कई गलियाँ खोदी गई हैं आंत खींचकर बाहर रख दी है मज़दूरों ने| रास्ते ऐसे सिकुड़ गए हैं जैसे गला दबा रहा है कोई इनका, प्रशासन ही है शायद|   मिट्टी की ढेरों के बीच कभी कभी जब टैक्सी चलती है GPS भी कहता है, 'भाई, कितने चक्कर लगवाओगे आज? … Continue reading मेरे घर क आस पास कई गलियाँ खोदी गई हैं